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आप हमे यह वस्तू देकर भी मदद कर सकते है | 

The following items will help us expand

  1. Instruments (Keyboard/Synthesizer, Dholki, Tabla, Dholak, Dimadi, Guitar, Ghungaru, Sambal, Percussions, Harmonium and other instruments) 

  2. Laptop and other study support material

  3. Mics 

  4. Speaker systems 

  5. Cameras 

  6. Tripods

  7. Drapery, Clothes

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Why donate ?

मायबाप जनताच चळवळीला जगवते! 

आज चळवळीला आर्थिक संकटातून बाहेर काढण्यासाठी संघर्षनिधी द्या. आजवर जनतेनेच चळवळीला जगवले आहे.

कोरोना- लॉकडाऊनच्या संकटाने सर्वच दलित-शोषित समूहांचे जगणे मुश्किल केले, त्यात सामाजिक- सांस्कृतिक चळवळ अपवाद नाही. याही काळात एक संघटना म्हणून पुढे जाताना किंबहुना खंबीरपणे उभं राहताना आज अनेक प्रश्न समोर आहेत. विद्यार्थी- कलाकार- कार्यकर्त्यांचे पुढचे शिक्षण कसे होणार? शिक्षण सोडून कुटुंबाला हातभार लावावा लागेल अशीच परिस्थिती आहे.

 

संघटनेचे कार्यालय म्हणजे पूर्ण वेळ कार्यकर्ते आणि विद्यार्थी कार्यकर्त्याचा निवारा.. गेले कित्येक महिने दोन जिल्ह्यांतील कार्यालये टिकवण्यासाठी धडपड सुरू आहे. त्यात पोटात रोज घालायचे काय हा प्रश्न सोबतच उभा.

याही काळात कार्यकर्त्यांवर केसेस टाकून, जुन्या केसेस उकरून काढून 50 लाख, 10 लाख एवढ्या रकमेची जामीन, बंधपत्रे मागून सरकार सत्याच्या बाजूने उभं राहण्याची किंमत मागतंय! उरली सुरली ऊर्जा कोर्टाच्या प्रक्रियांत खर्च होतेय. गेल्या 2 वर्षांहुन जास्त काळ संघटनेचे कार्यकर्ते सुधीर ढवळे एल्गार परिषद- भीमा कोरेगाव खटल्यात तुरुंगात आहेत. संपूर्ण आयुष्य चळवळीला वाहून घेतलेले ते जनतेचे फुलटायमर आहेत. त्यांच्या मनीऑर्डर पासून एकूणच कायदेशीर लढाईसाठी आर्थिक मदतीची गरज आहे. 

 

राज्य व्यवस्थेच्या दमनाचा उद्देशच चळवळीचे मनोबल खचवणे असतो. ब्राह्मणी फॅसिस्ट सरकार सत्तेत असताना जनतेच्या जगण्या-मरण्याच्या संघर्षात पूर्ण शक्तीने उतरू न शकण्याचं वैषम्य अंतर्मनाला खात आहे. अश्या काळात एक पाऊल पुढे टाकताना मागचं पाऊल कर्जाच्या आणि

दमनाच्या खाईत ओढले जातेय.

 

जयंतीचे कार्यक्रम, मानधन, डफ कलेक्शन, पुस्तकविक्री आणि सर्वच जुने आर्थिक स्रोत लॉकडाऊन मध्ये थांबलेत.

त्यामुळे नव्या आशेने नव्या ऑनलाईन माध्यमातून आर्थिक मदतीचे आवाहन करत आहोत. मदत अन्नधान्य व इतर वस्तूरूपात सुद्धा करू शकता. अधिकृत वेबसाईटवर जाऊन आपण आपली मदत देऊ शकता.

आजवर जनतेनेच चळवळीला जगवले, अनेक संकटांतून तारले, यापुढेही जनता सर्व सुख-दुःखात सोबत असेल हा विश्वास आहे.

जय भीम !

Masses are the one who sustain the movement !

Donate today to bring movement out of financial crisis. Masses only have sustained movements till now.

The government’s strict and blanket lockdown since March to “fight” the COVID-19 pandemic has adversely impacted Dalits and other oppressed communities. During such times, socio-cultural organisations are facing multiple grave challenges. As an organization, when we think of moving ahead or even just sustaining what we have, several dilemmas come up. Student members have been forced to choose between education and taking up jobs to feed their families. How will student activists and artists prioritise and complete their education?

 

Our office is a shelter for full time activists and student activists. However, we have been struggling to save our office spaces in two districts for several months. We are struggling to secure basic necessities such as food, water, and shelter. During such a time, government authorities are filing new cases against us and digging up older cases. Our members have been asked to get sureties as high as 50 lakhs and 10 lakhs for merely standing for the truth. Our residual energy, if any, is spent on fighting court cases. Our member, Sudhir Dhawale, has been in jail for over two years in the Bhima Koregaon-Elgaar Parishad case. He is a full-time activist who has dedicated his life to people's struggles. We need funds to support him and fight the legal battle.

 

State repression always has the intention of smashing the morale of our movement. At a time when Brahminical fascists are ruling, we have intensified our efforts for resistance and survival every day. However, when we take one step ahead, the struggles for daily necessities, debts and crackdowns pull us back.

 

We used to collect funds through socio-cultural performances celebrating important historic days, street plays, book sales, and more. Such events have stopped almost entirely during the lockdown. Therefore, with renewed energy we are appealing for solidarity through online contributions as we adjust to this “new normal,” and develop other sources of funding. You may also contribute food grains and other commodities.

 

It’s the masses who have always sustained the movement and helped each other during moments of crises. We are hopeful and sure that this will continue!

 

Jai Bhim!

माईबाप जनता ही आंदोलन को जिंदा रखती है!

आज आंदोलन को आर्थिक संकट से बाहर निकलने के लिए संघर्षनिधि दीजिए। आज तक जनता ने ही आंदोलन को जिंदा रखा है।

कोरोना- लॉकडाउन संकट ने सभी दलित-शोषित समूहों का जीना मुश्किल बना दिया है, इसमे सामाजिक- सांस्कृतिक आंदोलन कोई अपवाद नहीं है। एक संगठन के रूप में आगे बढ़ते हुए या दृढ़ होकर खड़े होते हुए भी आज हमारे सामने कई सवाल खड़े है। छात्रों- कलाकारों- कार्यकर्ताओंकी आगे की शिक्षा कैसे होगी? यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शिक्षा छोड़कर परिवार को संभालने में जुटना पड़े।

 

संगठन का कार्यालय मतलब पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं और छात्र कार्यकर्ताओं के लिए एक आश्रय है। पिछले कई महीनों से दो जिलों में कार्यालय बनाए रखने के लिए संघर्ष चल रहा है। उसमे हर दिन खान-पान की चिंता भी शामिल रहती है।

इसी दौरान, सरकार कार्यकर्ताओंके खिलाफ केसेस डालकर, पुराने केसेस को खोद कर 50 लाख रुपये, 10 लाख रुपये ऐसी रकम की जमानत, बंधपत्र माँगकर सरकार हमसे सच के पक्ष में खड़े रहने की किंमत माँग रही है। तो ऐसे बाकी ऊर्जा कोर्ट की कार्यवाही में खर्च हो रही है। संगठन के एक कार्यकर्ता, सुधीर धवले, एल्गार परिषद- भीमा कोरेगांव मामले में पिछले 2 सालों से ज्यादा समय जेल में बंद हैं। उनके मनीऑर्डर से लेकर समस्त कानूनी लड़ाई के लिए आर्थिक सहायता की जरूरत है।

 

राज्य व्यवस्था के दमन का यही उद्देश्य है की आंदोलन का मनोबल टूट जाए। ब्राह्मणी फासीवादी सरकार सत्ता में होने के दौरान जनता के जीने- मरने के संघर्ष में पूरी ताकत के साथ नहीं उतर पाने की भावना अंतर्मन को खा रही है। ऐसे समय में एक कदम आगे बढ़ाते हुए, पिछला कदम कर्ज और दमन की खाई मैं खिंचा जा रहा है।

 

जयंती के कार्यक्रम, मानदेय, डफ कलेक्शन, पुस्तक की बिक्री और सभी पुराने आर्थिक स्त्रोत लॉकडाउन में बंद हो गए।

इसलिए आज हम नई आशा के साथ नए ऑनलाइन माध्यम से आर्थिक मदद की अपील कर रहे हैं। आप अनाज और अन्य वस्तुओं के रूप में भी मदद कर सकते हैं। आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर मदद कर सकते हैं। लिंक साथ में दी है। 

आज तक जनता ने ही आंदोलन को जिंदा रखा है, अनेक कठिनाईयों से बचाया और आगे भी जनता सभी सुख-दुःख में साथ रहेगी, यह विश्वास है।

जय भीम!